वाराणसी (ब्यूरो)। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी अब पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी एक नया कीर्तिमान स्थापित करने जा रही है। गंगा तट के क...
वाराणसी (ब्यूरो)। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी अब पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी एक नया कीर्तिमान स्थापित करने जा रही है। गंगा तट के किनारे सुजाबाद डोमरी क्षेत्र में 350 बीघा जमीन पर एक विशाल 'शहरी वन' विकसित किया जाएगा। नगर निगम की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का औपचारिक शुभारंभ आगामी एक मार्च को तीन लाख से ज्यादा पौधों के रोपण के साथ होगा।
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| Purvanchal Samachar |
पर्यावरण के साथ आर्थिक समृद्धि का नया मॉडल
शुक्रवार को सिगरा स्थित नगर निगम सभागार में आयोजित प्रेसवार्ता में महापौर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने इस प्रोजेक्ट की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह वन न केवल शहर को शुद्ध ऑक्सीजन प्रदान करेगा, बल्कि नगर निगम के लिए आर्थिक स्वावलंबन का जरिया भी बनेगा। इसके लिए मध्य प्रदेश की एमबीके (MBK) संस्था के साथ एमओयू साइन किया गया है। यह संस्था तीसरे वर्ष से निगम को 2 करोड़ रुपये देगी, जिसके सातवें वर्ष तक 7 करोड़ रुपये वार्षिक होने की संभावना है।
मियावाकी तकनीक और औषधीय खेती का संगम
इस परियोजना की सबसे खास बात इसकी आधुनिक तकनीक है। यहां जापानी मियावाकी पद्धति के जरिए कम समय में घना जंगल तैयार किया जाएगा। साथ ही, यहां आयुर्वेद (औषधीय पौधों), फलों के बाग और फूलों की खेती का अद्भुत समन्वय देखने को मिलेगा। यह एक ऐसा आत्मनिर्भर इको-सिस्टम होगा जो आने वाली पीढ़ियों के लिए 'ऑक्सीजन बैंक' के रूप में कार्य करेगा।
